National Education Policy 2020 -स्कूलिंग से ग्रेजुएशन तक में क्या बदलेगा

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National Education Policy 2020

केंद्र सरकार ने बुधवार को शिक्षा के क्षेत्र में दो बड़े फैसले लिए हैं। पहला – केंद्रीय मानव संसाधनव विकास मंत्रालय (MHRD) का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) किया है। दूसरा – नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को स्वीकृति दे दी है।

The central government has taken two major decisions in the field of education on Wednesday. First – Union Ministry of Human Resource Development (MHRD) has been renamed as Ministry of Education. Second – New National Education Policy (NEP 2020) has been approved.

HighLights
  • 10+2+3 सिस्टम को बदला
  • स्कूल स्तर पर क्या बदला
  • नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA)
  • कॉलेज स्तर पर क्या बदला
  • अगले 15 साल में कॉलेजों को डिग्री देने की स्वायत्ता
  • विश्व की टॉप 100 यूनिवर्सिटीज में से कुछ को भारत आने का प्रोत्साहन
HighLights

Changed 10 + 2 + 3 systems
What changed at school level
National Testing Agency (NTA)
What changed at the college level
Autonomy to award degrees to colleges in next 15 years
Promotion of some of the world’s top 100 universities to visit India

स्कूल स्तर पर क्या बदला
मौजूदा 10+2+3 सिस्टम को बदला गया है। इसे 5+3+3+4 में बदला गया है। 5 साल का फाउंडेशनल एजुकेशन, 3 साल प्रिपरेटरी, 3 साल मिडल और 4 साल सेकंडरी लेवल पर स्कूलिंग कराई जाएगी।

बच्चे 6 साल की उम्र से पहली कक्षा की पढ़ाई शुरू करेंगे। 6 से 16 साल की उम्र में कक्षा 1 से 10वीं की पढ़ाई होगी। 16 से 18 साल उम्र में 11वीं-12वीं की पढ़ाई होगी।

स्टूडेंट्स को सभी विषयों में दो स्तर के विकल्प दिए जाएंगे। जैसे सीबीएसई ने इस बार 10वीं में मैथ्स में दो लेवल का विकल्प दिया था – बेसिक और स्टैंडर्ड। अब मैथ्स से शुरू कर इस तरह का विकल्प सभी विषयों में मिलेगा। स्टूडेंट्स अपनी इच्छानुसार कोई एक विकल्प चुनकर उसकी पढ़ाई कर सकेंगे।

स्कूलों में बच्चों को कम से कम 5वीं कक्षा तक उनकी गृह भाषा, मातृ भाषा और क्षेत्रीय भाषा में निर्देश दिए जाएं। हालांकि 8वीं और उससे आगे की कक्षाओं के लिए भी इसे अपनाया जा सकता है

बोर्ड परीक्षाओं को थोड़ा सरल बनाया जाएगा। परीक्षा ऐसी होगी जिससे कोर कंपीटेंसी की परख की जा सके। ऑब्जेक्टिव और सब्जेक्टिव पैटर्न पर ये परीक्षाएं साल में दो बार ऑफर की जाएंगी। इनमें से किसी एक का चुनाव स्टूडेंट्स कर सकेंगे।

परफॉर्मेंस असेसमेंट, रिव्यू एंड एनालिसिस ऑफ नॉलेज फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट (PARAKH) की स्थापना की जाएगी, जो बोर्ड परीक्षाओं के लिए स्टैंडर्ड सेटिंग बॉडी का काम करेगी।

स्कूल स्टूडेंट्स के लिए साल में 10 दिन बैगलेस (bag less days) होंगे। यानी इन 10 दिनों में उन्हें बैग में किताबों का बोझ लेकर स्कूल जाने की जरूरत नहीं। इस दौरान उन्हें इनफॉर्मल इंटर्नशिप कराई जाएगी।

कॉलेज स्तर पर क्या बदला
कॉलेजों में एडमिशन के लिए SAT की तरह एंट्रेंस टेस्ट लिए जाएंगे। ये परीक्षा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) कराएगी। देश के विभिन्न कॉलेजों में एडमिशन के लिए एनटीए द्वारा एक कॉमन कॉमलेज एंट्रेंस एग्जाम साल में दो बार लिए जाएंगे।
बैचलर डिग्री चार साल की की जाएगी। हालांकि 3 साल का भी विकल्प रहेगा। जो स्टूडेंट्स बीच में कोर्स छोड़ेंगे, उन्हें भी क्रेडिट ट्रांसफर और एक ब्रेक के बाद अपनी डिग्री पूरी करने का मौका मिलेगा।
12वीं के बाद कॉलेज स्तर पर चार विकल्प होंगे। चार साल के बैचलर कोर्स में पहला साल पूरा करने पर सर्टिफिकेट, दो साल पर एडवांस डिप्लोमा, तीन साल पर बैचलर डिग्री और चार साल पर रिसर्च के साथ बैचलर डिग्री कोर्स पूरा कर सकते हैं। यानी मल्टीपल एंट्री और एग्जिट का विकल्प मिलेगा।

अगले 15 साल में कॉलेजों को डिग्री देने की स्वायत्ता प्रदान कर दी जाएगी। कॉलेजों के लिए यूनिवर्सिटीज से मान्यता की जरूरत नहीं होगी। डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा भी खत्म किया जाएगा।

उच्च शिक्षा के लिए निजी संस्थानों में फीस कैप लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। यानी अधिकतम फीस तय की जाएगी।

विश्व की टॉप 100 यूनिवर्सिटीज में से कुछ को भारत आने का प्रोत्साहन दिया जाएगा। शीर्ष भारतीय संस्थानों को वैश्विक बनाने का प्रायस होगा।

2040 तक सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को मल्टीडिसिप्लीनरी बनाया जाएगा। पाली, प्राकृत, पर्सियन के लिए यूनिवर्सिटी कैंपसों में ही राष्ट्रीय संस्थान स्थापित किए जाएंगे

What changed at school level
Existing 10 + 2 + 3 systems have been replaced. This has been changed to 5 + 3 + 3 + 4. 5 years of foundation education, 3 years preparatory, 3 years middle and 4 years schooling at secondary level.
Children will start their first grade from the age of 6. Classes 1 to 10 will be taught at the age of 6 to 16 years. Education will be done from 11th to 12th at the age of 16 to 18 years.

Students will be given two levels of options in all subjects. For example, this time CBSE had given two level options in Maths – Basic and Standard. Now starting from Maths, this kind of option will be available in all subjects. Students will be able to study it by choosing one option as per their wish.

Instructions should be given to children in schools in their home language, mother tongue and regional language till at least 5th grade. However it can also be adopted for classes 8th and beyond.

Board exams will be simplified a bit. The examination will be such that the core competency can be tested. These exams on objective and subjective patterns will be offered twice a year. Students will be able to choose one of these.
The Performance Assessment, Review and Analysis of Knowledge for Holistic Development (PARAKH) will be established, which will serve as the standard setting body for board exams.
There will be 10 days a year for school students. That is, in these 10 days they do not need to go to school with the burden of books in their bags. During this, they will be given informal internships.


What changed at the college level
Entrance tests will be taken for admission in colleges like SAT. These exams will be conducted by the National Testing Agency (NTA). A common college entrance exam will be taken twice a year by the NTA for admission to various colleges in the country.
The Bachelor degree will be of four years. However, there will also be a 3-year option. Students who leave the course in between will also get a credit transfer and a chance to complete their degree after a break.
There will be four options at the college level after 12th. One can complete a four-year Bachelor course with a Certificate on completion of the first year, Advance Diploma on two years, Bachelor degree on three years and Bachelor degree course with research on four years. That is, there will be a choice of multiple entry and exit.

In the next 15 years, colleges will be given autonomy to award degrees. Colleges will not require accreditation from universities. The deemed university status will also be abolished.

It is proposed to impose a fee cap in private institutions for higher education. That means the maximum fees will be fixed.

Some of the world’s top 100 universities will be encouraged to visit India. There will be an effort to make the top Indian institutions global.

All higher education institutions will be made multidisciplinary by 2040. National institutes for Pali, Prakrit, Persians will be established in university campuses only

News Soure – NBT

 

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