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सकारात्मक भारत: नौकरी के साथ की यूपीएससी की तैयारी, 4 बार हुई फेल, 5 उन्हें प्रयास में मिली सफलता – जानें IPS रोहित कुमार की कहानी


“लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती” इस मिसाल का एक सटीक उदाहरण बिहार के आईपीएस रोहन कुमार हैं। एक समय पर पढ़ाई छोड़ने का निर्णय ले चुके रोशन को उनके माता-पिता के प्रोत्साहन ने जीवन में कुछ बड़ा करने का हौसला दिया जिसका नतीजा आज हम सबके सामने है। बचपन से ही पढ़ाई में एक एवरेज स्टूडेंट रहे रोशन को यूपीएससी परीक्षा पास करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने पांचवे प्रयास में यूपीएससी सिविल सेवा 2018 की मेरिट लिस्ट में रोशन ने 114 वां स्थान हासिल किया। उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा को अपना पहला विकल्प चुना था। आइये जानते हैं कि उनकी तैयारी के बारे में:

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20 किलोमीटर कॉलेज से रिजेक्ट हुए थे

मुजफ्फरपुर के रहने वाले रौशन का एकेडमिक बैकग्राउंड एवरेज से भी कम था। 12 वीं बोर्ड की परीक्षा में उन्होंने 58.6% अंक हासिल किए थे। रोशन कहते हैं कि “गणिहित-अंग्रेजी आदि में तो मैं घीसट कर रहे थे। उन्हें 12 वीं के रिजल्ट के बाद ही महसूस हो गया था कि उनका आईआईटी में दाखिला नहीं हो सकता था। उनके पिता के सहयोगी के संदर्भ में, मैंने प्रबंधन उद्धरण के माध्यम से प्रवेश पाने के लिए कर्नाटक में 3 महीने तक 20 से अधिक कंप्यूटर कॉलेजों से संपर्क किया। लगातार प्रयासों के बाद, मुझे 2006 में दक्षिण अफ्रीका में स्ट्रीम प्रवेश मिला। “

कैंपस बच्चों से मिली नौकरी पर मन में पुलिस में जाने का सपना था

कॉलेज में दाखिला मिलने के बाद रोशन ने सीएस में बेहतर प्रदर्शन किया और उन्हें कैंपस ट्रेनिंग के जरिये नौकरी मिल गई। लेकिन उनके मन में बचपन से पुलिस सेवाओं में जाने का सपना था। और इसी सपने को सच करने के लिए उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा देना का फैसला किया। हालांकि ये डगर आसान नहीं था क्योकि वह नौकरी छोड़ने का जोखिम नहीं ले सकते थे। ऐसे में उन्होंने 12 घंटेो की नौकरी के साथ ही यूपीएससी की तैयारी करने का फैसला किया।

पहले चार प्रयासों में असफल रहा

2014 में रोशन ने पहली बार प्रीलिम्स परीक्षा दी थी, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ कर तैयारी करने का सोचा लेकिन घर की जिम्मेदारी के कारण ऐसा नहीं किया। 2015 में वह एक बार फिर प्रीलिम्स में असफल रहा। 2016 में प्रीलिम्स क्लीयर हो गए, लेकिन मेन्स की तैयारी सही नहीं थी। मार्कशीट में उन्होंने देखा कि वह कट ऑफ से 124 नंबर दूर थे और उनका कॉन्फिडेंस बढ़ा और उन्होंने बेहतर तरीके से तैयारी करने का फैसला किया। 2017 में उन्होंने एक बार फिर प्रीलिम्स क्लियर कर मेंस की परीक्षा दी लेकिन इस बार भी केवल 12 नंबर से रह गए।

पाँचवे प्रयास में पूरा किया आईपीएस बनने का सपना

चार बार असफलता का सामना कर भी रोशन ने हिम्मत नहीं हारी। हर साल वह खुद को मंज़िल के लगभग भागते रहे और अंतिम 2018 की यूपीएससी परीक्षा में उन्होंने तीनो चरणों को पार कर 114 वीं रैंक हासिल की। जहाँ अधिकांश लोग DAF में आईएएस को अपनी पहली प्राथमिकता रखते हैं, रोशन ने आईपीएस को अपनी पहली पसंद रखा था और उन्हें आईपीएस सेवा के लिए चुना गया था।

यूपी पीसीएस 2020 में हरियाणा के मोहित रावत ने तीसरा स्थान हासिल किया है, यूपीएससी 2020 की में परीक्षा भी पास कर चुके हैं





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